जो मिला मुसाफ़िर वो रास्ते बदल डाले
दो क़दम पे थी मंज़िल फ़ासले बदल डालेआसमाँ को छूने की कूवतें जो रखता था
आज है वो बिखरा सा हौंसले बदल डालेशान से मैं चलता था कोई शाह कि तरह
आ गया हूँ दर दर पे क़ाफ़िले बदल डालेफूल बनके वो हमको दे गया चुभन इतनी
काँटों से है दोस्ती अब आसरे बदल डालेइश्क़ ही ख़ुदा है सुन के थी आरज़ू आई
ख़ूब तुम ख़ुदा निकले वाक़िये बदल डाले– Hindi Poems
Dard Bhari Sad Alone Boy Poetry - Hindi Poems
0
June 05, 2021
Tags