ये कसक दिल की दिल में चुभी रह गई मेरी ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गई एक मैं, एक तुम और एक दीवार थी बीच में अपनी ज़िंदगी आधी-आधी बँटी रह गई
– Dard Shayari
ये कसक दिल की दिल में चुभी रह गई मेरी ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गई एक मैं, एक तुम और एक दीवार थी बीच में अपनी ज़िंदगी आधी-आधी बँटी रह गई
– Dard Shayari