हम ज़मीं को तेरी नापाक न होने देंगे, तेरे दामन को कभी चाक न होने देंगे। तुझ को जीते हैं तो ग़मनाक न होने देंगे, ऐसी इक्सीर को यूँ ख़ाक न होने देंगे। जी में ठानी है यही जी से गुज़र जायेंगे, कम से कम वादा ये करते हैं के मर जायेंगे। – जोश मलीहाबादी
– Independence Day Shayari