ठोकर न मार मुझे पत्थर नहीं हूँ मैं, हैरत से न देख मुझे मंज़र नहीं हूँ मैं। तेरी नज़रों में मेरी क़दर कुछ भी नहीं, मगर मेरी माँ से पूछ उसके लिए क्या नहीं हूँ मैं?
– Maa Shayari
ठोकर न मार मुझे पत्थर नहीं हूँ मैं, हैरत से न देख मुझे मंज़र नहीं हूँ मैं। तेरी नज़रों में मेरी क़दर कुछ भी नहीं, मगर मेरी माँ से पूछ उसके लिए क्या नहीं हूँ मैं?
– Maa Shayari